मक्का में ,शैतान को पत्थर मारने की प्रथा क्यों

मक्का में ,शैतान को पत्थर मारने की प्रथा क्यों

मक्का में ,शैतान को पत्थर मारने की प्रथा क्यों
मक्का में ,शैतान को पत्थर मारने की प्रथा क्यों

मक्का में ,शैतान को पत्थर मारने की प्रथा क्यों

मक्का ,इस्लाम धर्म का तीर्थ स्थान है . हर साल मक्का में लाखो लोग आते है . और एक विशेष जगह पर पत्थर मारते है . यह परम्परा कई सदियों से चलती आ रही है . दुनिया में शायद ही ऐसा कोई इस्लामी होगा ,जिसे यह प्रथा के पीछे की कहानी पता न हो , और इस प्रथा को कई लोग जानना चाहते है . मक्का दुनिया की सबसे पाक ( पवित्र ) जगह माना जाता है . एक विशेष स्थान पर पत्थर मारने की परम्परा है , दरसल वह शैतान को पत्थर मारने की परम्परा होती है और इस तरह हर मक्का जाने वाला यात्री ,यह प्रथा यानी शैतान को पत्थर मारता है .
हज़रत एब्रहेम का जन्म 4000 साल ईसापूर्व में हुआ, यह माना जाता है. इस्लाम से पहले उनके बारे में बाइबिल में भी लिखा हुआ है , एब्रहेम की काफी उम्र बीतने के बाद बुढ़ापे में उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ .जिससे वह बहुत प्यार करते थे .और उन्होंने प्यार से उनके पुत्र का नाम स्माइल रखा . ऐसा कहा जाता है की एक बार अल्लाह ने उनसे क़ुरबानी में उनकी सबसे पसंदिता चीज मांगी . लेकिन एब्रहेम की सबसे प्यारी चीज तो उनके पुत्र स्माइल ही थे . लेकिन एब्रहेम अल्लाह में विश्वाश रख ,अपने पुत्र की कुरबानी देने के लिए चल दिए . जब वह क़ुरबानी देने जा रहे थे तब रस्ते में उन्हें
शैतान मिल गया ,जो की इस क़ुरबानी में रूकावट डालना चाह रहा था .शैतान ने उनसे कहा की वो इस उम्र में क्यों अपने बेटे को कुर्बान कर रहे है .अगर क़ुरबानी अपने बेटे की दे दोगे तो फिर इस बुढ़ापे में कौन तुम्हे संभालेगा ,ऐसा सुनने से हज़रत एब्रहेम थोडा सोच में पड़ गये जिससे उनका क़ुरबानी का इरादा डगमगाने लगा .लेकिन अल्लाह में विश्वाश रखने से वह संभल गये और क़ुरबानी देने के लिए आगे बड गये . जब वह क़ुरबानी देने के स्थान में पहुचे तो उन्हें लगा की ,पुत्र के लिए भावना उनके क़ुरबानी को रोक सकती है . इसलिए उन्होंने अपनी आँखों में पट्टी बांध ली . और अपने बेटे की क़ुरबानी दे दि .जब उन्होंने आँखों से पट्टी हटाई और देखा तो उनका बेटा बिलकुल उनके सामने खड़ा हुआ था .और जहा क़ुरबानी दि वहा बकरा कुर्बान हो चूका था . वही से बकरा कुर्बान करने की प्रथा आई .
लेकिन इसके साथ शैतान को पत्थर मारने की प्रथा भी आई क्युकी वह अल्लाह के काम में बाधा डाल रहा था .इसलिए मक्का में एक स्थान में शैतान को पत्थर मारा जाता है .