मुहर्त का क्या महत्त्व है - kyu mahurat dekhte hai

मुहूर्त का क्या महत्त्व है / kyu mahurat dekhte hai

मुहर्त का क्या महत्त्व है - kyu mahurat dekhte hai
मुहर्त का क्या महत्त्व है – kyu mahurat dekhte hai

मुहूर्त का क्या महत्त्व है / kyu mahurat dekhte hai

मुहूर्त का अपना एक अलग महत्त्व है , हिन्दू धर्म के अनुसार मुहूर्त एक समय मापने की इकाई है , अभी के दिन में इसकादूसरा नाम शुभ समय बोलते है .कई लोग हर बड़े या छोटे काम करने के लिए ,किसी पंडित द्वारा मुहूर्त निकाला जाता है . इसके बारे में कहा जाता है की ,मुहूर्त में काम कभी नही बिगड़ता व उसका फल हमेशा अच्छा ही रहता है .इसलिए शादी ,या कंपनी को चालू करना यहाँ तक की वाहन भी मुहूरत से ही लोग खरीदते है .लेकिन आज के जीवन में महूरत मानने और ना मानने वाले लोग भी ज्यादा हो गये है , मुहूरत और चोख्डिया भी देखि जाती है . कुछ लोग तो भारत में आपको ऐसे भी मिलेंगे जो छोटे से छोटा सामान भी मुहूरत से खरीदते है . लेकिन ज़रूरी नही है हर काम मुहूरत पर करे . अधिकांश लोगो की शादी शुभ मुहूर्त में होती है ,और कई लोगो की शादी टूट जाती है फलस्वरूप लोगो का मुहूर्त पर विश्वाश हट जाता है. सीधा सीधा कहा जाये तो मुहूर्त से हर काम सफल हो और फल दाई हो ऐसा लोग नही मानते . मुहूर्त की परम्परा कहा से हुई है इसका उल्लेख अलग अलग जगह पर अलग अलग अलग मिलता है .
मुहूर्त की इकाई कुछ इस तरह से है , एक मुहूर्त 48 मिनट का होता है , मुहूर्त तो सभी अच्छे होते है लेकिन अमृत/जीव महूर्त और ब्रह्म मुहूर्त बहुत ही अच्छे या कह सकते है श्रेष्ठ माने गये है . ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से 2 घंटे पहले का होता है , इस ब्रह्म मुहूर्त को योग ,प्राणायाम और ध्यान के लिए अच्छा बता गया है . और इसके 2 घंटे पूर्व यानि सूर्योदय के 4 घंटे पहले जिव/अमृत ब्रह्म मुहूर्त होता है . ऐसे पुरे दिन भर में अलग अलग समय के अलग अलग ब्रह्म मुहूर्त है . भारत मेंमुहूरत का उल्लेख भगवान के समय से मिलता आ रहा है , यह परम्परा सदियों से चली आ रही है .

मुहूर्त व उनके समय का विवरण

01.12 — 02.00 ADITI अदिति
02.00 — 02.48 JIVA/AMRITA जीव/अमृत
02.48 — 03.36 VISNU विष्णु
03.36 — 04.24 YUMIGADYUTI युमिगद्युति
04.24 — 05.12 BRAHMA ब्रह्म
05.12 — 06.00 SAMUDRAM समुद्रम
06.00 — 06.48 RUDRA रुद्र
06.48 — 07.36 AHI आहि
07.36 — 08.24 MITRA मित्र
08.24 — 09.12 PITRU पितॄ
09.12 — 10.00 VASU वसु
10.00 — 10.48 VARA वाराह
10.48 — 11.36 VISVADEVA विश्वेदेवा
11.36 — 12.24 VIDHI विधि
12.24 — 13.12 SATAMUKHI सतमुखी
13.12 — 14.00 PURUHUTA पुरुहूत
14.00 — 14.48 VAHINI वाहिनी
14.48 — 15.36 NAKTANCARA नक्तनकरा
15.36 — 16.24 VARUNA वरुण
16.24 — 17.12 ARYAMA अर्यमा
17.12 — 18.00 BHAGA भग
18.00 — 18.48 GIRISHA गिरीश
18.48 — 19.36 AJAPAD अजपाद
19.36 — 20.24 AHIRBUDHNYA अहिर बुध्न्य
20.24 — 21.12 PUSA पुष्य
21.12 — 22.00 ASWINI अश्विनी
22.00 — 22.48 YAMA यम
22.48 — 23.36 AGNI अग्नि
23.36 — 24.24 VIDHATR विधातॄ
24.24 — 01.12 KANDA क्ण्ड

याद  रखने वाली बाते :- हर काम जो शुभ हो जिससे सभी को फायदा हो या किसी को भी नुकसान न हो . तो वह काम आप बिना मुहूर्त देखे भी कर सकते हो ,क्युकी भगवन की बनायीं दुनिया में समय निरंतर चलता रहता है , बुरा समय इंसान के किये गये कार्यो से उसकी जिंदगी में आता है , मुहूर्त बस समय को मापने की इकाई है . आपका हर काम किसी भी मुहूरत में सफल हो सकता है .