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सिंदूर से मांग भरने की प्रथा कब ,कहा और कैसे चालू हुई .

सिंदूर से मांग भरने की प्रथा कब ,कहा और कैसे चालू हुई

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सिंदूर मांग में क्यों लगते है व उसके वज्ञानिक फायदे sindur mang me bhare ,

सिंदूर ;- भारत में हर हिन्दू धर्म की महिला जो शादी शुदा जिन्दगी व्यतीत करती हो .वह हमेशा अपनी मांग में सिन्दूर लगाती है. सिन्दूर महिला के शादीशुदा होने का प्रतिक भी है. आज कल के ज़माने में महिला भले ही छोटा लेकिन सिन्दूर ज़रूर लगाती है. यह पवित्र माना जाता है . जिसका उपयोग पूजा पाठ में भी करते है. सिंदूर लगाने की प्रथा हिन्दू धर्म में बहुत समय से चली आ रही है. और इसका उल्लेख हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथो में भी मिलता है. लेकिन मुख्यतः इस परम्परा का सबसे ज्यादा चलन रामायण युग से मिलाता है. हर हिन्दू धर्म में रामायण भी बहुत लोकप्रिय गाथा रही है . इस कथा के अनुसार जब सीता माता ने अपनी मांग में सिंदूर लगाया था. जब हनुमान जी भी वह उपस्थित थे .उन्होंने सीता माता को जब सिंदूर लगाते देखा तो उनसे ,

सिन्दूर को मांग में भरने का कारण पूछा. तब सीता माता ने कहा यह सिन्दूर भगवन श्री राम के लिए है ,यह सिंदूर उनकी प्रसन्नता के लिए है. और मांग में सिंदूर को लगाने से पति की उम्र बढ़ती है .और पति पतनी का रिश्ता और भी मजबूत होता है . सीता माता के कहे सिंदूर लगाने के वचन से , पुरे राज्य में यह बात फैल गयी और सिंदूर को शुभ माना जाने लगा . और वहा से यह प्रथा और भी आगे बढ़ने लगी .सिन्दूर सुहागन होना भी दर्शाता है इसलिए यह प्रथा को सभी लोगो ने सराहा . हिन्दू समाज में पति को परमेश्वर का दर्जा दिया गया है .इसलिए पति की प्रसन्नता और दीर्घायु के लिए भी सिन्दूर लगाया जाता है .

सिंदूर से मांग भरने का वैज्ञानिक कारण

महिलाये और पुरुष दोनों के शरीर की रचना अलग अलग है . महिलाये सिंदूर अपने मस्तक (सर ) के ऊपर ,सीमंत पर लगाती है . जिसे आम भाषा में मांग भी कहते है . पुरुषो के मुकाबले महिलाओ का यह भाग बहुत ही कोमल रहता है.क्युकी सिंदूर में अधिक मात्रा में पारा धातु पाया जाता है . जिससे शारीर की विद्युत उर्जा नियत्रण होती है और साथ ही साथ यह बाहर के दुष्प्रभावो को भी ढाल की तरह रोके रखता है और हानि होने से बचाता है. अत: वैज्ञानिक द्रष्टि में भी महिलाओ को सिंदूर लगाना लाभदायी ही है.